Upper circuit : भारत सरकार ने हाल ही में कोकिंग कोल को ‘क्रिटिकल एंड स्ट्रेटेजिक मिनरल’ घोषित कर दिया, जिसके बाद कोल सेक्टर से जुड़ी कई PSU कंपनियों के शेयरों में जोरदार तेजी देखी गई। इस फैसले का सीधा फायदा Coal India और Bharat Coking Coal Limited (BCCL) जैसे सरकारी शेयरों में दिखा, जहां अचानक भारी खरीदारी देखने को मिली।
Coal India और BCCL के शेयरों की रैली
29 जनवरी 2026 के कारोबार में Coal India के शेयर लगभग 3% उछलकर करीब 456.95 रुपये के नए 52‑वीक हाई के आसपास पहुंच गए। वहीं हाल ही में लिस्ट हुई PSU कंपनी BCCL के शेयरों में लगभग 5% तक की तेजी दर्ज की गई और भाव करीब 39 रुपये तक चले गए। BCCL का IPO पहले ही जबरदस्त रिस्पॉन्स पाकर करीब 147 गुना सब्सक्राइब हुआ था और लिस्टिंग दिन पर लगभग 96% प्रीमियम पर लिस्टिंग हुई थी।
कोकिंग कोल को क्रिटिकल मिनरल बनाने का मतलब
कोकिंग Coal स्टील इंडस्ट्री के लिए बेहद जरूरी कच्चा माल है और भारत अभी अपनी लगभग 95% जरूरत आयात के जरिए पूरी करता है, जिससे हर साल बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा खर्च होती है। सरकार के इस फैसले के बाद कोकिंग कोल से जुड़े प्रोजेक्ट्स को तेज मंजूरी, गहरी खदानों की खोज में तेजी और प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी बढ़ने जैसे फायदे मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही क्रिटिकल मिनरल श्रेणी में आने से पर्यावरणीय मंजूरियों की प्रक्रिया आसान होने और खनन से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश बढ़ने की संभावना भी मजबूत हुई है।
भारत का कोल प्रोडक्शन
इकोनॉमिक सर्वे के मुताबिक भारत दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा कोयला भंडार रखने वाला देश है और कोयले की घरेलू सप्लाई लगातार बढ़ रही है। FY25 में भारत ने रिकॉर्ड 1,047.52 मिलियन टन कोयला उत्पादन किया, जो सालाना आधार पर करीब 5% की ग्रोथ है। इसके बावजूद सिर्फ कोकिंग कोल के मामले में आयात 2020‑21 के 51.20 मिलियन टन से बढ़कर 2024‑25 में 57.58 मिलियन टन तक पहुंच गया, जिससे आयात निर्भरता एक बड़ी चिंता बनी रही।
स्टील सेक्टर और Viksit Bharat लक्ष्य पर असर
सरकार का लक्ष्य है कि घरेलू स्टील इंडस्ट्री को सुरक्षित और सस्ती कच्चे माल की सप्लाई मिले, ताकि नेशनल स्टील पॉलिसी और Viksit Bharat के दीर्घकालिक लक्ष्यों को हासिल किया जा सके। कोकिंग कोल को क्रिटिकल मिनरल घोषित करने से सप्लाई‑चेन मजबूत होने, आयात पर निर्भरता घटने और ग्लोबल कीमतों में उतार‑चढ़ाव के असर को कम करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। इसी मजबूत नीति संकेत की वजह से PSU कोल कंपनियों के शेयरों में अचानक तेज रफ्तार दिखी और निवेशकों के पोर्टफोलियो की वैल्यू बढ़ गई।
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