वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने केंद्रीय बजट 2026 में “इंडिया Semiconductor mission 2.0” की घोषणा की, जिसका उद्देश्य भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग हब बनाना है। इस मिशन के तहत इंडस्ट्री की अगुवाई में रिसर्च, डिजाइन और ट्रेनिंग सेंटर तैयार किए जाएंगे ताकि देश में चिप डिजाइन से लेकर मैन्युफैक्चरिंग तक पूरा इकोसिस्टम विकसित हो सके।
40,000 करोड़ रुपये के नए फंड का महत्व
सरकार ने Semiconductor मिशन 2.0 के लिए फंड बढ़ाकर 40,000 करोड़ रुपये करने का ऐलान किया है। यह राशि उपकरण और कच्चे मटेरियल बनाने, इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (IP) डेवलप करने और सप्लाई चेन को मजबूत करने पर खर्च होगी, जिससे चिप्स के आयात पर निर्भरता घटाने में मदद मिलेगी। सरकार का लंबी अवधि का लक्ष्य है कि 2032 तक भारत दुनिया के टॉप 4 सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग देशों में शामिल हो सके।
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Semiconductor प्रोजेक्ट्स की मौजूदा स्थिति
भारत Semiconductor मिशन का पहला फेज 2021 के अंत में 76,000 करोड़ रुपये के बजट के साथ लॉन्च हुआ था। अभी देश में 10 सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है और इनमें से 4 प्रोजेक्ट्स से इसी साल चिप प्रोडक्शन शुरू होने की उम्मीद जताई गई है। यह प्रोजेक्ट्स शुरू होने के बाद भारत की घरेलू मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ेगी और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग में बड़े पैमाने पर रोजगार बनने की संभावना है।
बजट एलान के बाद शेयर बाजार की चाल
Semiconductor मिशन 2.0 की घोषणा के तुरंत बाद सेमीकंडक्टर से जुड़े कई शेयरों में तेज़ उतार-चढ़ाव देखने को मिला। रिपोर्ट के मुताबिक भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (BEL), ABB इंडिया और ASM Technologies जैसे कुछ शेयरों में 5% तक गिरावट आई, जबकि CG Power और Tata Elxsi जैसे स्टॉक्स में 5% तक की तेजी दर्ज की गई। सीजी पावर और टाटा एलेक्सी जैसे शेयरों में उछाल से निवेशकों में यह संकेत गया कि बाजार इस मिशन को सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन वाली कंपनियों के लिए पॉजिटिव ट्रिगर के रूप में देख रहा है।
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